नवजोत सिंह सिद्धू के नाम पर प्रियंका गांधी की मुहर: अन्य राज्यों में भी दिखेगा कांग्रेस के ‘पंजाब मॉडल’ का असर!

नवजोत सिंह सिद्धू के नाम पर प्रियंका गांधी की मुहर: अन्य राज्यों में भी दिखेगा कांग्रेस के ‘पंजाब मॉडल’ का असर!

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की नियुक्ति कर गांधी परिवार ने एक साहसिक फैसला किया है. इस निर्णय से गांधी परिवार ने पार्टी हाईकमान के रूप में अपने अस्तित्व को फिर से सर्वोच्च साबित किया है, जो लगातार चुनावी हार के कारण काफी कमजोर पड़ता नजर आ रहा था. इस ‘पंजाब मॉडल’ का असर सिर्फ पंजाब में ही नहीं, बल्कि राजस्थान में भी दिखाई देगा जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सचिन पायलट से चली आ रही खींचतान को अनदेखा करते आ रहे हैं.

इससे भी महत्वपूर्ण बात ये है कि पार्टी में अगर प्रियंका गांधी के फैसलों का असर बढ़ता हुआ नजर आता है, तो कांग्रेस में प्रशांत किशोर और कमलनाथ की बड़ी भागीदारी भी देखने को मिल सकती है.

सिद्धू की नियुक्ति का श्रेय प्रियंका को

ऐसा इसलिए भी समझा जा रहा है क्योंकि, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की नाराजगी के बावजूद नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब की कमान देने के फैसले का श्रेय पार्टी के अंदर प्रियंका गांधी को ही दिया जा रहा है. कैप्टन अमरिंदर ने अपने विरोधी सिद्धू की ताजपोशी रोकने की हर मुमकिन कोशिश की, हर पैंतरा अपनाया लेकिन गांधी परिवार ने अपना मन नहीं बदला.

दरअसल, प्रियंका गांधी को ये फीडबैक मिला था कि आम आदमी पार्टी सिद्धू को लेकर ज्यादा संजीदा नहीं है, वो सिर्फ सिद्धू को कांग्रेस के एक बागी के रूप में देखना चाहती है और चुनाव में फायदा उठाना चाहती है.

इसमें कोई शक नहीं है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह एक सम्मानित नेता हैं. वो एक बेहतर पूर्व आर्मी कैप्टन के साथ अच्छे इतिहासकार भी हैं लेकिन पार्टी के आंतरिक मामलों में वो थोड़ा अलग नजर आए. उनके अपने तरीके ने ही उनके लिए समस्याएं पैदा कर दी हैं और ये ऐसे वक्त में हुआ है जब वो 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगे हैं.

हाईकमान को इग्नोर करते रहे कैप्टन

दो महीने पहले प्रियंका गांधी ने चंडीगढ़ में अपना दूत भेजकर पंजाब के सियासी हालात पर चर्चा करने का जो संदेश भिजवाया था, उसे कैप्टन अमरिंदर ने दरकिनार कर दिया. कैप्टन ने पार्टी हाईकमान के इस दूत को न सिर्फ 48 घंटे तक इंतजार कराया बल्कि उन्हें बिना किसी संदेश लिए ही वापस दिल्ली कूच करना पड़ा. कांग्रेस की परंपरा के लिहाज से कैप्टन अमरिंदर के इस रवैये को अगर ईशनिंदा न भी कहा जाए तो ये एक तरीके की अवहेलना तो थी ही.

इसके अलावा भी कैप्टन गुट की तरफ से कुछ ऐसे चीजें की गईं जो उनके खिलाफ ही गईं. जब मल्लिकार्जुन खड़गे, हरीश रावत और जेके अग्रवाल के रूप में कांग्रेस का एक पैनल बनाया गया और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से चुनावी तैयारियों को लेकर उनकी राय मांगी गई तो उनके कुछ करीबी और समर्थक वरिष्ठता की दुहाई देते रहे. यहां तक कि इस बात को 79 साल के कैप्टन अमरिंदर की समझ पर सवाल के रूप में पेश किया गया.

कांग्रेस पैनल की बात भी नहीं मानी

इस सबके बीच, तीन सदस्यीय कमेटी ने 18 बिंदुओं की सिफारिश रिपोर्ट जमा करा दी. इस कमेटी ने कैप्टन अमरिंदर से सिद्धू को चुनावी तैयारियों में लगाने और ‘सुटेबल’ पद देने की बात कही. बाजवूद इसके कैप्टन अमरिंदर टाल-मटोल करते रहे, जबकि सिद्धू खुद को राहुल और प्रियंका की च्वाइस के रूप में सफलतापूर्वक पेश करते रहे.

फिलहाल, पार्टी हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस का रास्ता तय कर दिया है. अब ये देखना होगा कि कैप्टन अमरिंदर सिद्धू के साथ कैसे पेश आते हैं और सिद्धू कैसे कैप्टन को साधते हैं. क्योंकि अगर कैप्टन अमरिंदर बगावत करते हैं तो अब तक कांग्रेस और प्रियंका की जो स्टोरी बहुत अच्छी नजर आ रही है वो अस्तित्व बचाने की एक गंभीर लड़ाई बन जाएगी.

प्रियंका समेत गांधी परिवार कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रति सहानुभूति रखता है और उनके प्रति काफी नरम भी रहा है. गांधी परिवार की नजर सांसद प्रताप सिंह बाजवा और मनीष तिवारी पर भी है, जो सिद्धू से खुश नहीं हैं. उन्हें लगातार ये बताया जा रहा है कि सभी फैसले सिर्फ एक चीज को ध्यान में रखकर लिए गए हैं कि कैसे कांग्रेस पंजाब में अकाली, बीजेपी और आप को हराकर फिर से सत्ता में वापसी करे.

Amit Singh

Amit Singh

अमित सिंह, सच भारत में राजनीति और मनोरंजन सेक्शन लीड कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 5 साल का अनुभव है। इन्हें राजनीति और मनोरंजन क्षेत्र कवर करने का अच्छा अनुभव रहा है।थियेटर एक्टर रह चुके अमित ने टीवी से लेकर अखबार और देश की विभिन्न विख्यात वेबसाइट्स के साथ काम किया है।इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की दर्जनों शख्सियतों का वीडियो और प्रिंट इंटरव्यू भी लिया है।अमित सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा लखनऊ से प्राप्त करने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से टीवी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है।

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