August Kranti: जब करोड़ो भारतीयों ने खाई एक-साथ शहीद होने की कसम, वर्षगांठ पर जाने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ से जुड़े रोचक तथ्य

August Kranti: जब करोड़ो भारतीयों ने खाई एक-साथ शहीद होने की कसम, वर्षगांठ पर जाने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ से जुड़े रोचक तथ्य

द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू (Second World War) होने के बाद महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (Quit India Movement) की योजना बनाई. इसके लिए 08 अगस्त 1942 की तारीख तय की गई. भारत मां को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए और अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर करने के लिए एक सामूहिक नागरिक अवज्ञा आंदोलन करो या मरो आरंभ करने का निर्णय लिया गया. पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस जन आंदोलन (Quit India Movement) को याद किया जाएगा.

‘1857 का स्वतंत्रता संग्राम’और ‘1942 का भारत छोड़ो आंदोलन’(1857 Revolution And 1942 Quit India Movement)

भारत की आजादी से संबंधित इतिहास में दो पड़ाव सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण नजर आते हैं- पहला ‘1857 का स्वतंत्रता संग्राम’ (1857 Revolution) और दूसरा ‘1942 का भारत छोड़ो आंदोलन’ (1942 Quit India Movement). इस आंदोलन को अगस्त क्रांति (August Kranti) के नाम से भी जाना जाता है. यह आजादी के आंदोलन में सबसे बड़ा जन संघर्ष था. आज देश इस आंदोलन की 79वीं वर्षगांठ मना रहा है. आइए इस आंदोलन से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों पर नजर डालते हैं .

महात्मा गांधी ने दिया करो या मरो का नारा (Mahatama Gandhi… Do or Die)

इस आंदोलन से देश के हर कोने का आदमी जुड़ गया था. यही वह दौर था जब अंतिम रूप से भारत छोड़ो की बात सामने आई. महात्मा गांधी ने जब ‘करो या मरो’ (Do or Die) का नारा दिया, तो ये शब्‍द सुनते ही अपने आप देश के करोड़ो लोगों ने शहीद होने के कसम खा ली. इस दौरान गांधी जी ने कहा था कि मैं पूर्ण स्वतंत्रता से कम किसी भी चीज पर संतुष्ट होने वाला नहीं हूं. हम करेंगे या मरेंगे.

गांधी जी को किया गया नजरबंद (Mahatama Gandhi Arrested)

आंदोलन की शुरूआत होते ही अंग्रेजों ने गिरफ्तारियां शुरू कर दी. 8 अगस्‍त को आंदोलन शुरू हुआ और 9 अगस्त 1942 को दिन निकलने से पहले ही कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी सदस्य गिरफ्तार हो चुके थे और कांग्रेस को गैरकानूनी संस्था घोषित कर दिया गया था. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस जनान्दोलन में 940 लोग मारे गए थे और 1,630 घायल हुए थे जबकि 60,229 लोगों ने गिरफ्तारी दी थी. वहीं अंग्रेजों ने गांधी जी को अहमदनगर किले में नजरबंद कर दिया.

संगठित हुआ देश

इस आंदोलन का उद्देश्य आजादी हासिल करने के साथ-साथ संपूर्ण देश को एक संगठन के रूप में जोड़ना भी था. आंदोलन के अंत में, ब्रिटिश सरकार ने संकेत दे दिया था कि सत्ता का हस्तांतरण कर उसे भारतीयों के हाथ में सौंप दिया जाएगा. आंदोलन का ऐलान करते वक्त गांधी जी ने कहा था, यह जो लड़ाई छिड़ रही है वह एक सामूहिक लड़ाई है. इसका असर ऐसा दिखा कि 1943 के अंत तक भारत को संगठित कर दिया.

कई जगहों पर भारी हिंसा

इस आंदोलन का असर ऐसा था कि, देशभर में कई जगहों पर आंदोलनकारियों ने अंग्रेजी सत्ता और उसके प्रतिष्ठानों के खिलाफ हिंसा का सहारा लिया. करीब 250 रेलवे स्टेशन, 150 पुलिस थाने और 500 से ज्यादा पोस्ट ऑफिस जला दिए गए. कांग्रेस भी इसे नियंत्रित नहीं कर पाई क्योंकि इसके सारे नेता जेल में थे.

अंडरग्राउंड रेडियो

आंदोलन के दौरान अरुणा आसफ अली और उषा मेहता लगातार अंडरग्राउंड रेडियो स्टेशन संचालित करती रहीं. इसके जरिए आंदोलनकारी देश के दूसरे हिस्सों में हो रही गतिविधियों को जान सकते थे. नवंबर 1942 में अंग्रेज सरकार ने इसे पकड़ लिया.

हड़ताल पर गए कर्मचारी

गांधी जी द्वारा चलाए गए सबसे बड़े जान आंदोलन को और मजबूत करने के लिए, विद्यार्थी और कामगार हड़ताल पर चले गए. बंगाल के किसानों ने करों में बढ़ोतरी के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया. सरकारी कर्मचारियों ने भी काम करना बंद कर दिया, यह एक ऐतिहासिक क्षण था. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ही डॉ राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण और अरुणा आसफ अली जैसे नेता उभर कर सामने आए. अंग्रेज सरकार के भयानक बर्बर और अमानवीय दमन के बावजूद देश के करोड़ों लोगों का योगदान प्रत्येक पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है.

Amit Singh

Amit Singh

अमित सिंह, सच भारत में राजनीति और मनोरंजन सेक्शन लीड कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 5 साल का अनुभव है। इन्हें राजनीति और मनोरंजन क्षेत्र कवर करने का अच्छा अनुभव रहा है।थियेटर एक्टर रह चुके अमित ने टीवी से लेकर अखबार और देश की विभिन्न विख्यात वेबसाइट्स के साथ काम किया है।इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की दर्जनों शख्सियतों का वीडियो और प्रिंट इंटरव्यू भी लिया है।अमित सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा लखनऊ से प्राप्त करने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से टीवी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है।

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